tag:blogger.com,1999:blog-7515498610706051107.post5285271607780297455..comments2007-10-27T12:35:47.555-07:00Comments on एक पंक्ति: जाओ चाँद अपने घर जाओ..हमें फ़ुरसत नहीं तुम्हें निहा...एक पंक्तिhttp://www.blogger.com/profile/09512951673791168585noreply@blogger.comBlogger1125tag:blogger.com,1999:blog-7515498610706051107.post-68655061284229361932007-10-27T12:35:00.000-07:002007-10-27T12:35:00.000-07:00सुन्दर है, अपने ही मनोभावों का चित्रण परंतु चाँद स...सुन्दर है, अपने ही मनोभावों का चित्रण परंतु चाँद से इर्ष्या की बात ठीक नहीँ। हम कुछ सीख भी तो सकते हैं अपनी अनियंत्रित ऊष्मा को शीतलता में बदलने का सबक। मज़ा यह कि चाँद त यह पाठ हर 28 दिन बाद सिखाने ही आ जाता है!राजीवhttp://www.blogger.com/profile/04166822013817540220noreply@blogger.com