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Friday, October 19, 2007

हम नहीं लिखेंगे ...टिप्पणी.

क्योंकि....

हमेशा सच नहीं लिख सकते

लिखने का मतलब ...हमने लिखी ... आप भी लिखो

सामने वाले की तारीफ़ करने में तकलीफ़ होती है


लिख देने के बाद भी हमारे लिये तो कोई कुछ लिखता ही नहीं

लिखने के लिये पूरा का पूरा पढना पडता है

लिखने की कोई ज़ोर ज़बरदस्ती है क्या साहब

हमने लिख दी और किसी ने फ़िर हमारे लिखे पर नहीं लिखी तो

कौनू फ़रक परत है साहेब

नाही लिखबै...तो क्या आप नाही लिखा करी

Sunday, September 30, 2007

उधारी है शबाब पर

क्रेडिट कार्डों के कल्चर में

उधारी है शबाब पर

वादे निभाने में उधारी

इक़रारनामें में उधारी

बिटिया की गुडिया उधार

माँ की दवाई उधार

भाई की किताब उधार

यहाँ उधार के मानी ये नहीं

कि सारा साज़ो-सामान उधार ख़रीद

कर ला दिया है माँ,बेटी और भाई के लिये

यहाँ उधार के मानी हैं किसी काम को टालने

की एक बेशरम जद्दोजहद

उधार शब्द ज़िंदगी के बेतरतीब,लापरवाह
और गै़रज़िम्मेदार होने की पुष्टि है

नक़द के रूप में उपलब्ध है

वाचालता
दुर्व्यवहार
बे ईमानी
झूठ
लम्पटता
असभ्यता
झाँसे
ताने
ईर्ष्या
असहजता
असहिष्णुता
नाइंसाफ़ियाँ

बाज़ार के इस उधार -नक़द कुचक्र में
रिश्ते हैं छलनी
बिला वजह का बड़बोलापन,दंभ है विस्तृत
क्या करें...
ख़त्म ही करें इस शब्द जाल को
क्योंकि मै नया क्या बता रहा हूँ
मुझसे ज़्यादा तो आप जानते हैं
या तो ऐसे कुचक्रों को आप हम ही तो रचते हैं
या ऐसे कुचक्रों में फ़ँसते हैं

शो मस्ट गो ऑन