Thursday, August 9, 2007

एक पंक्ति का पहला सच !

मुशरर्फ़ मान जाओ...पद का मोह छोड़ो...बहुत तबाह किया जम्भूरियत को...तुम्हारा तबाह होना अनक़रीब है...

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