Thursday, August 9, 2007

नक़ली हँसी.

बचो रे इन नक़ली हँसी वालों से...
इश्तिहारों में
कारोबारों में
परिवारों में
कोई हँसी दिल खु़श करने के लिये नहीं
व्यापार है भाई.

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